स्वागतम!

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December 3, 2013

ग़ज़ल
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आसमां,अब्रो-हवा से आशनाई चाहिए
हाँ क़फ़स से हर परिंदे को रिहाई चाहिए
फैसलाकुन जंग हो जाए हुजूमे-फिक्र से
हार हो कि जीत पर मुझको लड़ाई चाहिए
मुंह फुला कर किसलिए बैठे हो,चुप हो किसलिए
क्या खिलौना चाहिए ,कैसी मिठाई चाहिए
रात की तारीकियों पर मैं उजाला लिख तो दूँ
बस पसीने की मुझे कुछ रोशनाई चाहिए
ये अजब दस्तूर है नाराज़गी का प्यार में
आँख बस दो-एक पल में डबडबाई चाहिए
किन हदों तक वुसअतें शफ्फाफियों की आ गईं
आपको बारिश भी अब धोई ,नहाई चाहिए
कामयाबी के लिए आसान हैं शर्तें मियाँ
बेईमानी,बेहिसी और बेहयाई चाहिए

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