ग़ज़ल
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कुछ फ़सीलें उठाने की कोशिश
बाढ़ में घर बचाने की कोशिश
घिर रहा है उफ़ुक़ पर अँधेरा
अब करूँ टिमटिमाने की कोशिश
दर्द की ये अदा है पुरानी
वो करेगा डराने की कोशिश
हार जायेंगे आंसू यक़ीनन
कीजिये मुस्कुराने की कोशिश
याद आयेंगे सारे मनाज़िर
तुम करो तो भुलाने की कोशिश
जाल में फँस गए पाँव तो क्या
मैं करूँ छटपटाने की कोशिश
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कुछ फ़सीलें उठाने की कोशिश
बाढ़ में घर बचाने की कोशिश
घिर रहा है उफ़ुक़ पर अँधेरा
अब करूँ टिमटिमाने की कोशिश
दर्द की ये अदा है पुरानी
वो करेगा डराने की कोशिश
हार जायेंगे आंसू यक़ीनन
कीजिये मुस्कुराने की कोशिश
याद आयेंगे सारे मनाज़िर
तुम करो तो भुलाने की कोशिश
जाल में फँस गए पाँव तो क्या
मैं करूँ छटपटाने की कोशिश
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