स्वागतम!

स्वागतम!

December 1, 2013

ग़ज़ल
---------

लाचारी में हूँ, हैरानी में हूँ मैं
जह्नो-दिल की खींचातानी में हूँ मैं

बीच भंवर वालों की क्या हालत होगी?
खौफ़ज़दा जब छिछले पानी में हूँ मैं

था इक वक़्त कि मेरा दिल भी बाग़ी था
शामिल अब फौज़े-सुल्तानी में हूँ मैं

ज़द में हूँ मैं दिल की सी.सी.टी.वी. की
चौबीसों घंटे निगरानी में हूँ मैं

यूँ महसूस हुआ कल इक नॉविल पढ़ कर
ये मेरा किरदार,कहानी में हूँ मैं

हर सूरत में मुझको तनहा होना है
भीड़ में हूँ या फिर वीरानी में हूँ मैं

रहमत होनी है ‘सौरभ’ तो उन पर हो
जिनकी तुलना में आसानी में हूँ मैं.

No comments:

Post a Comment